Mansa devi story in Hindi | माँ मनसा देवी की कहानी | Mansa devi birth story
Mansa devi story in hindi

Mansa devi story in Hindi | माँ मनसा देवी की कहानी | Mansa devi birth story

क्या आप जानते हैं, माँ मनसा देवी कौन हैं, मनसा देवी का जन्म कैसे हुवा, Mansa devi story in Hindi, थता उनका मंदिर कहाँ स्थित है, यदि नहीं तो चलिए आप को बताते हैं। 

हिन्दुओं के पवित्र स्थल हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए जाने वाले भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र ना सिर्फ गंगा जी की अविरल धारा ही होती है, बल्कि गंगा स्नान के साथ-साथ माँ मनसा देवी के दर्शन करना व उनका आशीर्वाद प्राप्त करना भी भक्तों के लिए उतना ही अधिक फलदाई साबित होता है। यह कहा भी जाता है, की यदि आप स्नान के लिए हरिद्वार आए हैं, तो आपको अवश्य ही माँ मनसा देवी के दर्शन भी करने चाहिए। 

उत्तराखंड राज्य को देव भूमि के नाम से पुकारा जाता है, क्योंकि यहाँ कण-कण में देवी देवताओं का वास है, और साथ ही यहाँ विभिन्न तीर्थ स्थल भी मौजूद हैं। उन सभी प्रसिद्ध तीर्थों में से एक हरिद्वार भी है, जिसे स्वर्ग का द्वार भी कहा जाता है। श्रद्धालु जो गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आते हैं, वे माँ मनसा देवी के दर्शन अवश्य करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है, की माँ मनसा देवी के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है। 

माँ मनसा देवी का यह मंदिर हरिद्वार से लगभग 3 किलोमीटर की दुरी पर पहाड़ की चोटी पर  स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए पैदल रास्ता थता केबल कार जिसे यहाँ देवी उड़नखटोला के नाम से पुकारा जाता है, उसके द्वारा जाया जा सकता है। 

मनसा देवी का यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ देवी की दो मूर्तियां स्थापित हैं, थता मंदिर के बीचों-बीच एक बड़ा वृक्ष लगा हुवा है, जिसमें श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए धागा बांधते हैं, और माँ मनसा देवी के समक्ष प्रण लेते हैं, की वे भविष्य में दोबारा माता के दर्शन करने अवश्य आएँगे।

नवरात्रों के दिनों में मनसा देवी का यह मंदिर फूलों से सजा दिया जाता है, और इस समय यहाँ दर्शन के लिए भक्तों की बहुत भारी भीड़ उमड़ती है, थता मंदिर का भव्य नजारा देखते ही बनता है। 

Mansa devi story in Hindi | मनसा देवी की कहानी

माँ मनसा देवी को नाग माता थता विश की देवी के नाम से जाना जाता है, और उनके चारों ओर सर्प व नाग सदैव उनकी रक्षा के लिए विधमान रहते हैं। उनका आसान हँस है, थता उनके एक हाथ में सफ़ेद और दूसरे में लाल कमल पुष्प मौजूद है।

ऐसा माना जाता है, की माँ मनसा देवी की कृपा जिस व्यक्ति पर होती है, उसे कभी भी नाग दंश का सामना नहीं करना पड़ता है, और यदि किसी व्यक्ति पर नाग दोष है, तो वह दोष भी मनसा देवी की कृपा से समाप्त हो जाता है। 

माँ मनसा देवी के जन्म की कहानी

माँ मनसा देवी के जन्म से जुड़ी कई कहानियाँ प्रचलित हैं। मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री कहा जाता है, थता उन्हें महर्षि कश्यप की मानस पुत्री भी कहा जाता है। चलिए माँ मनसा देवी के जन्म से जुड़ी कुछ कहानियां जानते हैं। 

मान्यता अनुसार एक बार जब भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर स्थित एक दिव्य तालाब के निकट निर्त्य कर रहे थे, तो उनके आलोकिक निर्त्य से एक तेज उत्पन्न हुवा और वह तेज उस दिव्य तालाब में स्थित कमल पुष्प के पत्ते पर जा गिरा।

जिसके बाद उस तालाब में मौजूद सभी जेहरीले नाग-सर्प उस दिव्य तेज के समीप आ गए और उन्होंने उस तेज को अपनी कुंडली में समेट लिया। समय बितता गया और बाद में उस तेज ने एक कन्या का रूप लिया जिन्हे माँ मनसा देवी के नाम से जाना गया।  

दूसरी कहानी

दूसरी कहानी यह भी है, की जब एक बार भगवान शिव योगी का रूप धारण कर के धरती पर विचर रहे थे, तब उनका मनमोहक रूप देखकर एक स्त्री उन पर मोहित हो गई और वो योगी  के रूप में विचर रहे भगवान शिव को वश में करने के लिए शिव वशीकरण मंत्र का ही जाप करने लगी। 

तब भगवान शिव अपने मंत्र की मर्यादा रखने के लिए स्त्री के वश में हो गए और उनके बीच संबंध से जिस कन्या की उत्पत्ति हुई वह कन्या मनसा देवी के नाम से प्रसिद्ध हुई। बाद में जब मनसा देवी भगवान शिव व माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत पर पहुँची तो शिव के गले में लटके नागराज वासुकि ने भगवान शिव से विनती करि की उनकी कोई बहन नहीं है, इसलिए  उनकी बहन के रूप में देवी मनसा को नागलोग भेज दिया जाए। 

भगवान शिव ने नाग देवता वासुकि की बात मानते हुवे देवी मनसा को नाग लोक भेज दिया और उन्हें नागलोक का साम्राज्य प्रदान कर दिया गया। जिसके बाद माता मनसा पूरी नाग जाती की बहन बन गई और तब से सभी जहरीले नाग सर्प उनकी आज्ञा मानने लगे। 

कहा जाता है, की समुंद्र मंथन के बाद जब भगवान शिव ने कालकूट विष पी लिया था, तब उस विष की तीव्रता इतनी अधिक थी, की भगवान शिव के कंठ में भी उस विष से पीड़ा पहुँचने लगी थी। तब मनसा देवी ने ही उस विष की तीव्रता को कम कर भगवान शिव के कंठ से कालकूट विष को समाप्त किया था। 

तीसरी कहानी

कथा अनुसार जब एक समय धरती पर नागों, सापों, सरीसर्पों  का आतंक बड़ गया था, उनकी मात्रा काफी अधिक हो गई थी, जिससे मनुष्य भयभीत रहने लगे। तब वे अपनी इस समस्या को लेकर महर्षि कश्यप के पास पहुंचे और उन्होंने अपनी मनोवेदना महर्षि के समक्ष प्रकट करि।

मनुष्य की समस्या को कश्यप जी ने समझा और गहन विचार के बाद उन्होंने अपने मन में एक ऐसी कन्या का संकल्प किया जो किसी भी विष से अधिक शक्तिशाली हो, और जिससे धरती पर उत्पन्न हुई समस्या का समाधान हो सके।

जिसके बाद महर्षि कश्यप के मस्तिक्ष में जन्मे विचार से देवी मनसा का जन्म हुवा क्योंकि उनकी उत्पत्ति कश्यप जी के मन से हुई थी इसीलिए उन्हें मनसा नाम से पुकारा जाने लगा, जिसके बाद ब्रह्मा जी ने मनसा देवी को सभी सरीसर्पों का देवता बनाया। 

तो आपने माँ मनसा देवी के जन्म से जुड़ी तीन प्रकार की कहानियाँ पढ़ी, Mansa devi birth story in Hindi, और इन सभी कहानियों से एक बात स्पष्ट होती है, की माँ मनसा देवी नागों, सापों और विष की देवी हैं। जो भक्त माँ मनसा देवी की पूजा आराधना करते हैं, उन्हें काल सर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। 

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